India AI Summit 2026: जब दुनिया के सबसे बड़े AI दिग्गज भारत आए और जो हुआ वो किसी ने सोचा भी नहीं था
कुछ घटनाएं होती हैं जो इतिहास में दर्ज हो जाती हैं। और कुछ घटनाएं होती हैं जो इतिहास में दर्ज होने से पहले ही इंटरनेट पर वायरल हो जाती हैं। पिछले हफ्ते नई दिल्ली में हुआ India AI Impact Summit 2026 इन दोनों श्रेणियों में आता है।
16 से 20 फरवरी 2026 तक भारत मंडपम में चले इस पांच दिवसीय महासम्मेलन ने न सिर्फ दुनिया को यह बताया कि भारत AI की दौड़ में एक बड़ा खिलाड़ी बनने जा रहा है — बल्कि इस इवेंट ने कई ऐसे लम्हे भी दिए जो लोग लंबे समय तक याद रखेंगे। कुछ शानदार वजहों से, कुछ शर्मनाक वजहों से।
तो चलिए, इस ऐतिहासिक और विवादास्पद समिट की पूरी कहानी जानते हैं — बिना किसी लाग-लपेट के।
India AI Summit 2026: जब दुनिया के सबसे बड़े AI दिग्गज भारत आए और जो हुआ वो किसी ने सोचा भी नहीं था
🌍 भारत ने दुनिया को दिया एक बड़ा संदेश
पहले बात करते हैं उस बड़े सवाल की — यह समिट हुई क्यों?
दुनिया में AI की रेस अभी दो देशों के बीच मानी जाती है — अमेरिका और चीन। Google, OpenAI, Anthropic एक तरफ, तो DeepSeek और Baidu दूसरी तरफ। इस रेस में बाकी दुनिया बस तमाशबीन बनकर बैठी थी। भारत ने इसी तस्वीर को बदलने की कोशिश की।
"भारत का मानना है कि AI तकनीक तभी फायदेमंद होगी जब वह साझा हो। तभी हमारे लाखों युवा दिमाग इसे बेहतर और सुरक्षित बना पाएंगे।"
PM नरेंद्र मोदी, India AI Impact Summit 2026
यह समिट ग्लोबल साउथ में आयोजित पहला बड़ा अंतर्राष्ट्रीय AI सम्मेलन था — जिसमें लैटिन अमेरिका, अफ्रीका और एशिया के देशों को भी AI की बातचीत में शामिल किया गया। 2,50,000 से ज़्यादा पंजीकृत प्रतिभागियों के साथ यह दुनिया के सबसे बड़े AI आयोजनों में से एक बना।
💰 $200 अरब से ज़्यादा का निवेश — भारत के लिए गेमचेंजर
अगर समिट के नतीजों की बात करें तो आंकड़े चौंकाने वाले हैं।
रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने घोषणा की कि वे अगले सात सालों में 10 लाख करोड़ रुपये यानी करीब 110 अरब डॉलर भारत के AI इंफ्रास्ट्रक्चर में लगाएंगे। अदानी ग्रुप ने 2035 तक 100 अरब डॉलर के रिन्यूएबल एनर्जी-आधारित AI डेटा सेंटर बनाने का ऐलान किया।
विदेशी कंपनियां भी पीछे नहीं रहीं। Microsoft ने ग्लोबल साउथ में दशक के अंत तक 50 अरब डॉलर लगाने का वादा किया। OpenAI ने टाटा ग्रुप के साथ साझेदारी की और 100 मेगावॉट कंप्यूट भारत में तैनात करने की योजना बनाई। Anthropic ने Infosys के साथ डील साइन की और बेंगलुरु में अपना ऑफिस खोला।
OpenAI के Sam Altman ने खुद बताया कि भारत में हर हफ्ते 10 करोड़ से ज़्यादा लोग ChatGPT इस्तेमाल करते हैं — अमेरिका के बाद यह दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा बाजार है।
🤝 वो वायरल लम्हा — जब Sam Altman और Dario Amodei ने हाथ नहीं मिलाया
अब आते हैं उस लम्हे पर जिसने पूरी दुनिया में सुर्खियां बटोरीं।
समिट के दौरान PM मोदी सभी टेक दिग्गजों के साथ एक ग्रुप फोटो के लिए स्टेज पर आए। सब एक-दूसरे का हाथ थामे खड़े थे। लेकिन OpenAI के CEO Sam Altman और Anthropic के CEO Dario Amodei — दोनों ने हाथ नहीं मिलाया। बजाय इसके, उन्होंने अपनी मुट्ठियां ऊपर उठा लीं।
यह वीडियो देखते ही देखते वायरल हो गया। सोशल मीडिया पर "AI Cold War" ट्रेंड करने लगा। मीम्स की बाढ़ आ गई।
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बाद में Sam Altman ने कहा कि वे "कन्फ्यूज" थे और उन्हें समझ नहीं आया कि क्या करना है। लेकिन लोग इस सफाई को हल्के में लेने के मूड में नहीं थे। क्योंकि सिर्फ कुछ दिन पहले Anthropic ने Super Bowl में एक विज्ञापन चलाया था जिसमें परोक्ष रूप से OpenAI पर निशाना साधा गया था।
🇮🇳 भारतीय AI का उभरता सूरज — Sarvam, BharatGen और Gnani
विदेशी दिग्गजों की बातें तो हो गईं, लेकिन इस समिट में भारतीय AI स्टार्टअप्स ने भी खूब धूम मचाई।
भारतीय AI कंपनी Sarvam ने अपने स्मार्ट ग्लासेस "Sarvam Kaze" का ऐलान किया — जो देश में ही डिजाइन और बनाए जा रहे हैं। कंपनी ने Qualcomm, HMD और Bosch के साथ साझेदारी भी की। सरकार समर्थित BharatGen ने 22 भारतीय भाषाओं में काम करने वाला "Param 2" मॉडल लॉन्च किया। Voice AI स्टार्टअप Gnani ने 12 भाषाओं वाला वॉयस क्लोनिंग मॉडल "Vachana" पेश किया।
😳 शर्मिंदगी वाले पल — गालगोटिया यूनिवर्सिटी का 'चीनी रोबोट'
गालगोटिया यूनिवर्सिटी ने समिट की प्रदर्शनी में एक रोबोट डॉग "Orion" दिखाया और दावा किया कि यह उनके सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा 'विकसित' किया गया है। लेकिन इंटरनेट पर लोगों ने चंद मिनटों में पकड़ लिया कि यह रोबोट दरअसल चीनी कंपनी Unitree का बनाया हुआ है।
विपक्षी कांग्रेस पार्टी ने इसे तुरंत हथियार बनाया। IT मंत्री ने एक गलत रिपोर्ट शेयर की और बाद में डिलीट करनी पड़ी। अराजकता का यह नज़ारा काफी देर तक सोशल मीडिया पर छाया रहा।
⚠️ AI और नौकरी असली डर जो हर भारतीय के मन में है
समिट से बाहर इन्हीं दिनों एक और खबर वायरल हुई जो शायद ज़्यादा असरदार है।
Reddit पर एक भारतीय सॉफ्टवेयर डेवलपर की पोस्ट वायरल हुई। उसने बताया कि काम के बोझ और तंग डेडलाइन के बीच उसने AI टूल से कोड लिखवाया। वह कोड प्रोडक्शन में गया और पूरा सिस्टम क्रैश हो गया। नतीजा — नौकरी चली गई।
Vinod Khosla जैसे दिग्गज निवेशक कह रहे हैं कि IT Services और BPO जैसे सेक्टर अगले पांच साल में "लगभग पूरी तरह गायब" हो सकते हैं। यह डर असली है। और इससे मुंह नहीं मोड़ा जा सकता।
🔮 क्या भारत सच में AI सुपरपावर बनेगा?
भारत के पास टैलेंट है, मार्केट है, और अब निवेश का वादा भी है। लेकिन जानकारों की राय बंटी हुई है। Gavekal Research के Udith Sikand ने कहा — "भारत बड़े-बड़े एलान तो कर रहा है, लेकिन बिजनेस करने की असली दिक्कतें अभी भी हल नहीं हुई हैं।"
बुनियादी ढांचा, इंटरनेट की पहुंच, भाषाई विविधता और डेटा गोपनीयता — ये सब चुनौतियां अभी भी बनी हुई हैं।
लेकिन Google DeepMind के एक वरिष्ठ अधिकारी के शब्दों में — "भविष्य में कई DeepSeek जैसे पल आने वाले हैं और उनमें से कुछ भारत से भी आएंगे।" यह उम्मीद झूठी नहीं लगती।
✅ निष्कर्ष
India AI Impact Summit 2026 एक आईना था — जिसमें भारत ने दुनिया को अपनी महत्वाकांक्षा दिखाई, और दुनिया ने भारत को उसकी कमज़ोरियां भी। Sam Altman और Dario Amodei का हाथ न मिलाना, गालगोटिया का चीनी रोबोट, $200 अरब के वादे — सब कुछ एक ही हफ्ते में हुआ।
AI का भविष्य रोमांचक है, जटिल है, और थोड़ा अजीब भी। लेकिन एक बात तय है — भारत अब इस खेल में दर्शक नहीं, खिलाड़ी बनना चाहता है।
और दुनिया देख रही है।
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आपके हिसाब से क्या भारत 2030 तक AI सुपरपावर बन सकता है?
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